E20 पर गडकरी को अंतरिम राहत, सोशल मीडिया कंपनियों को पोस्ट हटाने के निर्देश

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ प्रसारित कुछ कथित डीपफेक वीडियो और मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया। यह सामग्री केंद्र सरकार के E20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम से संबंधित बताई गई है।
न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने प्रथम दृष्टया संबंधित सामग्री को अपमानजनक और आपत्तिजनक माना। अदालत ने Meta, X Corp और Google LLC से चिह्नित पोस्ट तथा वीडियो पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा। अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद प्लेटफॉर्म आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री की पहचान कर उसे स्वतः हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं विकसित कर सकते।
यह आदेश गडकरी की ओर से दायर 11 करोड़ रुपये के सिविल मानहानि मुकदमे में अंतरिम राहत के रूप में आया है। मुकदमे में सोशल मीडिया कंपनियों के साथ अज्ञात यूजर्स और कंटेंट बनाने वालों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
भविष्य में ऐसी पोस्ट मिलने पर प्लेटफॉर्म को दे सकेंगे सूचना
अदालत ने गडकरी को यह स्वतंत्रता भी दी कि भविष्य में इसी तरह की कथित रूप से मानहानिकारक या डीपफेक सामग्री सामने आने पर वह संबंधित प्लेटफॉर्म को इसकी जानकारी दे सकते हैं। प्लेटफॉर्म को ऐसी शिकायत पर उचित कार्रवाई करनी होगी।
Meta की ओर से सुनवाई के दौरान कहा गया कि कुछ सामग्री निष्पक्ष आलोचना के दायरे में भी आ सकती है। इस पर गडकरी की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया कि मुकदमे का उद्देश्य सरकार की नीति पर होने वाली निष्पक्ष आलोचना या सार्वजनिक बहस को रोकना नहीं है। आपत्ति कथित रूप से गढ़ी गई, अपमानजनक और गलत जानकारी पर है।
प्रतिवादी पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होने की संभावना है।
गडकरी ने क्या आरोप लगाए हैं?
गडकरी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि एआई से तैयार और डिजिटल रूप से बदली गई सामग्री के जरिए उन्हें E20 कार्यक्रम के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बताया गया। कुछ पोस्ट में यह दावा भी किया गया कि इस नीति से उनके परिवार को आर्थिक लाभ हुआ।
मंत्री का कहना है कि इन दावों से उनकी प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व अधिकारों को नुकसान पहुंचा। उन्होंने आपत्तिजनक सामग्री हटाने, भविष्य में उसके प्रसार पर स्थायी रोक लगाने और 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की है।
गडकरी ने अदालत में यह भी कहा कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम का प्रशासन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। वह वर्तमान में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री हैं। उनके अनुसार, सोशल मीडिया सामग्री में दोनों मंत्रालयों की भूमिकाओं को गलत तरीके से मिलाकर पेश किया गया।
पहले मिली थी मुकदमा दायर करने की अनुमति
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को गडकरी को लेटर्स पेटेंट के क्लॉज 12 के तहत मुकदमा दायर करने की अनुमति दी थी। यह प्रक्रिया क्षेत्राधिकार से जुड़ी थी, क्योंकि संबंधित ऑनलाइन सामग्री मुंबई में भी देखी जा सकती थी।
इसके बाद 5 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने सामग्री हटाने की अंतरिम राहत दी। इस प्रकार रेफरेंस सामग्री में बताई गई केवल “मुकदमा दायर करने की अनुमति” के बाद अब अदालत का नया और अधिक महत्वपूर्ण आदेश सामने आ चुका है।
E20 पेट्रोल क्या है?
E20 पेट्रोल में मात्रा के आधार पर 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। केंद्र सरकार का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है। इसका घोषित उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और घरेलू स्तर पर तैयार जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
हालांकि E20 के इस्तेमाल से वाहनों की माइलेज और पुराने मॉडलों की अनुकूलता को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है। 30 जुलाई 2026 को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, वाहन की श्रेणी और उसकी उम्र के आधार पर ईंधन दक्षता में करीब 2 से 6 प्रतिशत तक अंतर आ सकता है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि परीक्षणों में E20 के कारण इंजन फेल होने का प्रमाण नहीं मिला।





